Sunday, May 18, 2014

On Dancing - ...नृत्य...



Acrylic knife painting on 11x14 canvas


A touch
A look
A smile
The rhythm
Flowing naturally
Moving as one
Totally at ease
  
Connected at the heart
By the heart
Not thinking
Just being
Gliding around gracefully
   
Some drama
Some emotion
A spin, a whirl
Pure poetry in motion

Out of the blue
A move that's new
Some mis-steps
Laughter!
Tripping and
Toes complaining

A lightness
Sheer Joy
Endless possibilities
To enjoy
Looking deep into
Each other's eyes


-Seattle, 24 December, 2011

एक स्पर्श
एक नज़र
एक मुस्कान
सुर और ताल
स्वाभाविक सा बहना
एक हो कर चलना
है कितना आसान

जुड़े हुए से दिल
ह्रदय का मिलाप
ना सोचने की वजह
यहाँ सिर्फ है बस लय
सुरों की इनायत

थोड़ी नौटंकी
कुछ भावनाएँ
गोल घूमती गतिशील
शुद्ध कविताएँ

यकायक की वो
नयी सी चाल
बहके
जब कदम तो
हँसी छलके गाल गाल
पैरों की उँगलियों
का हाल है बेहाल

इक हल्कापन
सरासर
आनंद
अंतहीन संभावनाओं
का प्रबंध
आँखों
अंगों के
पवित्र मिलन की सुगंध


-अनुवादन - मई १६, २०१२

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